अब वक़्त आ गया है,जब उत्तर भारतीयों का विरोध कर रही शिवसेना और मनसे के खिलाफ कांग्रेस आवाज़ उठाये॥
आखिर सत्ता की शक्ति में भी जो आवाज इतने दिनों से जबरन दबा कर रखी हो,उसे सही वक़्त पर बाहर आना ही था,और अब वक़्त आ गया है,जब बिहार में चुनाव होने वाले हैं,और सिर्फ यही एक मुद्दा है जो केन्द्रीय सत्ता को बिहार में एक आशा की उम्मीद दे सकता है(वैसे ये उम्मीद भी नाकाफी ही है).......और आग में घी डालने के लिए तो ठाकरे खानदान हमेशा से तैयार बैठा है।
और जब ये आग पूरी तरह भड़केगी तो,निश्चित रूप से फायदा कांग्रेस का ही होगा।
वैसे हवा में जहर तो बहुत पहले से घुल रहा है,युवराज को इसकी भनक आज लगी है,इतने भोले नही हैं वो,और उनके चमचे भी...वो तो बस अवसर के ताक में बैठे रहे।
मुझे ये समझ में नही आता,कि केंद्र में आपकी सरकार है,महाराष्ट्र में आपकी सरकार है,फिर अभी तक किसकी राह देख रहे थे राहुल बाबू?
प्रधानमंत्रीजी ने तो खैर इतना भी जरूरी ऩही समझा,सब कुछ सरकार के हाथ में पहले भी था,जो अब है,लेकिन इंतज़ार था तो सिर्फ इस बात का कि राहुल जी मुँह खोले,और फिर कार्रवाई हो,ताकि श्रेय एक बार फिर होनहार युवा नेता,एकमात्र उन को ही मिले॥
राहुल जी ने राष्ट्रीय राजनीति में छाने से पहले जमीनी तौर पर कुछ नही किया,मुझे नही लगता कि कभी स्थानीय निकाय के चुनावों में एक मतदाता के रूप में भी वे सम्मिलित हुए हों(अगर हुए तो कृपया सन्दर्भ देने कि कृपा करेंगे)....हाँ राजनीति के खानदानी पेशे में कदम रखते ही कांग्रेस के सभी जगमग सितारे धुंधलाने लगे,और स्वामिभक्ति दिखाते हुए बड़े कद वालों ने बौना बनना स्वीकार कर लिया,कायल हूँ मैं आपकी स्वामीभक्ति के कांग्रेसजनों ।
राहुल जी सच की राह पर चलते हैं,वे ऐसे किसान हैं,जिसे हल चलाना तो दूर,पकड़ना भी नही आता.वो हमारे देश के ऐसे कर्मठ और जूझारू नेता हैं,जिन्हें राजनीति में आने से पहले देश के बारे में उतना ही पता था,जितना मुझे अजर बेजान के बारे में,तो उन्हें देश के हर भाग में घुमाया जा रहा है,सांप भी मर रहा है,और लाठी भी मजबूत हो रही है.....देश वाले भी सोच के मस्त हैं कि भावी शासक हमारे बारे में बहुत चिंतित हैं,जबकि ऐसा नही है,होगा भी तो मुझे नही लगता।
हाल में राहुल जी बिहार आये,उन्होंने कहा बिहार की ये हालत इसीलिए है कि कांग्रेस की सरकार नही है राज्य में,कांग्रेस में वही आगे बढेगा जिनके रिश्तेदार राजनीति में नही हैं,अब नेता जमीन से निकलेंगे,हेलीकाप्टर से गिराए नही जायेंगे........और भोली जनता खो गयी इन मीठी बातो में....
लेकिन ये बात खटक रही है,कि आप किस जमीन से आये हो?हमने तो जब भी देखा आप अपने पार्टी के सर आँखों पर ही दिखे.....और मैंने ही क्या किसी ने भी आपको टिकट के लिए परेशां होते नही देखा....आपकी तो सीधी हाई क्लास एंट्री हुयी थी ना....वो क्या कहते हैं..."धमाकेदार".
और मुझे अब तक के अपने ज्ञान से यही पता लगा कि बिहार में सबसे ज्यादा दिनों तक कांग्रेस ही सत्ता में रही है.....लेकिन जाने दो,जो कह दिया मान गए,अब तो आपको जाना चाहिए ना.....जब तक आप राजनीति में बने रहोगे,कोई दूसरा राजनीति में आगे कैसे बढेगा?....सिंधिया साहब,सचिन पायलट साहब,देवड़ा साहब,सब लोग क्या इसीलिए स्टार हैं कि उनके रिश्तेदार राजनीति में नही थे?
या खुद आप?
तो क्यूँ नही अपनी कथनी को सच कर दिखाते हैं,मार्ग प्रशस्त कीजिये उनके लिए जिन्होंने खानदानी पेशे के रूप में नही,बल्कि देश के लिए राजनीति में आने का दुस्साहस किया हो॥
लेकिन आपके सिब्बल साहब तो खुद कहते हैं कि आगे बढ़ने के लिए जी हजूरी जरूरी है...मेरे ख्याल से खुद के आगे बढ़ने के लिए जी हजूरी के बजाय देश के लिए उन्होंने कुछ करने की कोशिश की होती तो मैं भी उनका प्रशंसक होता.
छोडिये इन सब बातों को,बस अब आपसे यही उम्मीद लगाये बैठे हैं कि कभी देश की अन्य प्रतिभाओं पर भी आप भरोसा करें और आम युवाओं को भी आगे आने दें,अपने पीछे ना लगायें.पिछलग्गुओं की फ़ौज खड़ी करने से बेहतर है एक नेता को आगे आने का मौका दें.
खैर ये मेरी गलती नहीं कि वास्तविक नेता आपकी पार्टी में जाने से कतराते हैं,क्यूंकि टॉप फ्लोर का पासवर्ड तो सिर्फ आपके नाम पर सेव है।
अगर आप नही सुनते तो देशवालो सुनो,जो आपके बीच पला है,बढ़ा है,सिर्फ उसको चुनो।
सिर्फ सुनो मत,कभी कभी सोच भी लिया करो.
दलितों के लिए आरक्षण की मांग करने वाले,खुद अपने लिए सत्ता के उच्च वर्ग में अघोषित आरक्षण लिए बैठे हैं,उन्हें अपना हक़ मारने से रोको.जाहे जो भी बताया जाय,किया जाए,युवा का नाम लेकर युवाओं को बहलाया जाए,युवा कों आगे बढ़ने का मन्त्र राहुल जी की ऊँचाई बढ़ने के लिए ही सिद्ध किया गया है।
क्या कभी कांग्रेस ऐसे युवा को राहुल जी के आगे जाने देगी,जो वास्तव में योग्य हों,मुझे नहीं लगता की ये उन्हें किसी सूरत में स्वीकार होगा...
आगे बढ़ना है,देश को बढ़ाना है तो आगे बढिए,पिछलग्गू ना बनिए.
8 comments:
राहुल जी वक्त बहुत पहले ही आ चुका है शिवसेना जैसी ताकतो के विरोध में खड़े होने की
sahi kaha
word verification hata de to acchha hoga
सही सोच और अच्छा प्रस्तुतिकरण्। वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दीजिए, तकलीफ़ देता है
देश को बढ़ाना है तो आगे बढिए,पिछलग्गू ना बनिए.
sahi kaha
bahut achchha.....swagat hai aapka!!!!
आप सब लोगो को बहुत धन्यवाद.
उम्मीद है यूँ ही आपलोग मेरी सोच को प्रेरणा देते रहें.
सुझाव और टिप्पणियों के लिए शुक्रिया.
हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें
जनता के बीच पले बढ़े भी राजनेता की जमात में शामिल होते ही बदल जाते हैं और भूरा साहिब बन जाते हैं।
आप अच्छा लिखते हैं।
Post a Comment